Monday, 21 September 2015

गवारिया जाती राजस्थान कि जन जाती हे ! बहुत हि सघ्रष भरा जिवन बिताने के बाद अब आधुनिक युग से जुडने लगे है ! अब हर काम को कुश्लता पुर्वक कर रहै है ! गवारिया जाती मे ऩया्य व फेसले अहम तरिके से लिए जाते है ! पंचो फेसला अटल होता है ! पती जीवित है तो पत्नी को दुसरी ब्याय कि अनुमती नही है यानी ( नाता प्रथा ) बरसो से बंद है ! शादी हो या कोई त्योहार बडी धुमधाम से मनाते है !.....
आज समाज मे एजुकेशन बढ गया है व हर काम को एक नई दिशा दे रहै है .....आज ये समाज जो काम कर रहा है .....
इनका पिढीयो से काम तो कटलेरी ( चुडिया ) का था लेकिन शायद आजिवीका चलाने के लिए काफी नही था इसलिए दुसरा काम कर रहै है जैसै..................कपडे कि दुकान , मार्बल माईन्स , टिचर , बडे - बडे लोहे का गेदाम ,  हेण्डिक्राप्ट , किसी कि मार्केट ने खुद कि दुकाने बडा तरर्कि कर रहा है समाज  बहुत ही शांत स्वभाव व मिलनसार किस्म के होते है ये लोग ......
       लेखक
तेजाराम गवारिया